ज़िंदगी हमे ये कहाँ ले आयी ?

ज़िंदगी हमे ये कहाँ ले आयी ? खुश थे जहाँ से ले आयी | गुज़रे दिनों की धुप थी क़बूल, क्यों बारिश कहाँ से ले आयी ? किसी अटके हुए पल की तरह | किसी माथे की बल की तरह | किसी सवाल-ए-बेहाल की तरह| किसी जले हुए काल की तरह | गोया खींच के वहाँ से […]

via ज़िंदगी हमे ये कहाँ ले आयी ? — Agastya Kapoor की दुनिया

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