कालिख

Image Credit: Google गुनाह तेरा लब खामोश मेरी, तेरे वहशीपन पर उड़ी होश मेरी, क्या कहें ये तेरी कैसी बेहयाई है, तेरे इस कुकृत्य से पूरी मानवता शरमाई है, तेरे इस कुकृत्य से पूरी मानवता शरमाई है। एक को भूल नही पाते,दूसरा सामने आ जाता है, अपनी मर्दानगी का घिनौना रूप दिखा जाता है, किसको […]… Continue reading कालिख

ज़िंदगी हमे ये कहाँ ले आयी ?

ज़िंदगी हमे ये कहाँ ले आयी ? खुश थे जहाँ से ले आयी | गुज़रे दिनों की धुप थी क़बूल, क्यों बारिश कहाँ से ले आयी ? किसी अटके हुए पल की तरह | किसी माथे की बल की तरह | किसी सवाल-ए-बेहाल की तरह| किसी जले हुए काल की तरह | गोया खींच के… Continue reading ज़िंदगी हमे ये कहाँ ले आयी ?

Paper and pen…… — Lifewithwordssite

छोटी छोटी खुशियां ढूंढती हूं मैं, इस विशाल वक्त के समंदर में, जैसे गोताखोर ढूंढता है मोती, एक विशाल गहरे समंदर में । उड़ती चली जाती हूं वक्त के साथ मैं, इस आसमान की ऊंचाई की तलाश में, ना जाने कब वो मंजर आएगा, मैं हूँ कब से जिसकी तलाश में । इन आँखों ने […]… Continue reading Paper and pen…… — Lifewithwordssite

अभी कुछ काम करो

आने वाला कल, कल ही आएगा, उसके लिए ना तुम विचार करो, करना ही है तो बस, अभी कुछ काम करो ।। जो बीत गया वो कल, कभी वापस नहीं आएगा, उसके लिए ना तुम मलाल करो, करना ही है तो बस, अभी कुछ काम करो ।। टूट गए जो सपने कल, कल फिर नये… via… Continue reading अभी कुछ काम करो

गुजरता वक्त

“शाम गुजर रही है, खुद को खुद से मिलाने में। सुबह गुजर रही है, ज़िन्दगी से रफ़्तार मिलाने में। दिन गुजर रहे है, आने वाले दिनों को मिलाने में। पल गुजर रहे है, पीछे और आगे के पलों को मिलाने में। और ज़िन्दगी गुजर रही है, देखो ज़िन्दगी को मिलाने में।” via गुजरता वक़्त……. — Lifewithwordssite